15वें वित्त की राशि में कथित हेरफेर? मोहनमुंडा पंचायत में उठे गंभीर सवाल, सरपंच के परिवार से जुड़े खाते में पहुंची राशि!



महासमुंद जिले के ग्राम पंचायत मोहनमुंडा से 15वें वित्त आयोग की राशि के कथित दुरुपयोग और लेन-देन को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। आरोप है कि पंचायत में विकास कार्यों के लिए जारी 15वें वित्त की राशि में अनियमितता बरती गई और इसमें पंचायत के सरपंच नेपाल चंद सिदार एवं सचिव ममता चौहान की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि 15वें वित्त की राशि में से कथित तौर पर पंचायत सरपंच के परिवार से जुड़े एक व्यक्ति के बैंक खाते में राशि आहरित/हस्तांतरित की गई। यदि दस्तावेजों में यह लेन-देन सही पाया जाता है, तो यह जांच का गंभीर विषय हो सकता है।
🔎 परिवार से जुड़े खाते में राशि पहुंचने का आरोप
सवाल यह है कि पंचायत निधि की राशि आखिर किस कार्य के लिए स्वीकृत हुई थी और भुगतान किसके नाम तथा किस आधार पर किया गया? संबंधित व्यक्ति का सरपंच से क्या संबंध है और उसके खाते में सरकारी राशि पहुंचाने के पीछे पंचायत का कौन-सा कार्य या बिल दर्शाया गया है?
❓ उठ रहे कई बड़े सवाल
- 15वें वित्त की राशि किस कार्य के लिए स्वीकृत हुई?
- भुगतान किस बिल, वाउचर और कार्यादेश के आधार पर किया गया?
- सरपंच के परिवार से जुड़े व्यक्ति के खाते में राशि क्यों पहुंची?
- क्या मौके पर संबंधित कार्य वास्तव में हुआ है?
- भुगतान से पहले पंचायत स्तर पर आवश्यक प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं?
- क्या पूरे मामले की जनपद पंचायत एवं जिला स्तर से जांच कराई जाएगी?
ग्रामीणों/शिकायतकर्ताओं की मांग है कि eGramSwaraj के भुगतान विवरण, बैंक स्टेटमेंट, बिल-वाउचर, मस्टर रोल, कार्यादेश और मौके पर हुए निर्माण कार्य का भौतिक सत्यापन कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
⚠️ अब जांच की मांग तेज
मामले में निष्पक्ष जांच होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि राशि का भुगतान नियमों के अनुरूप हुआ या फिर सरकारी धन के उपयोग में किसी प्रकार की अनियमितता हुई।
अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले की जांच कब शुरू करते हैं और दस्तावेजों की जांच के बाद क्या सच्चाई सामने आती है।