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August 31, 2026 1:41 pm

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घरघोड़ा में करोड़ों की पैतृक जमीन पर बड़ा विवाद: बंटवारे से पहले नामांतरण, कंपनी के नाम रजिस्ट्री पर गंभीर सवाल

रायगढ़/घरघोड़ा। घरघोड़ा तहसील के ग्राम चारमार में करोड़ों रुपये मूल्य की पैतृक कृषि भूमि को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। पीड़ित पक्ष ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि बंटवारा लंबित होने के बावजूद कुछ खसरा नंबरों का नामांतरण कर दिया गया और बाद में उसी भूमि की रजिस्ट्री एक निजी कंपनी के नाम कर दी गई। मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

शिकायतकर्ता चिंतामणि गुप्ता एवं सरधाकर गुप्ता का कहना है कि लगभग 71.767 हेक्टेयर पैतृक भूमि आज भी संयुक्त खाते में दर्ज है तथा बंटवारे का प्रकरण सक्षम न्यायालय में विचाराधीन है। उनका आरोप है कि बिना अंतिम आदेश और सभी हिस्सेदारों की सहमति के कुछ भूमि का नामांतरण कर दिया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई है।

पीड़ित पक्ष का यह भी आरोप है कि शिकायत किए जाने के बाद राजस्व अभिलेखों में संशोधन किए गए। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो इससे राजस्व रिकॉर्ड की पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

शिकायत के अनुसार, 5 मई 2026 को विवादित भूमि की रजिस्ट्री बी.एस. स्पंज प्रा. लि. के पक्ष में की गई। पीड़ित पक्ष का दावा है कि रजिस्ट्री विवादित परिस्थितियों में हुई और इसकी वैधानिक जांच आवश्यक है।

मामला और गंभीर तब हो गया जब विवाद जारी रहने के बावजूद भूमि पर बाउंड्री वॉल, पिलर तथा अन्य निर्माण कार्य शुरू होने का आरोप लगाया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनके पास इस संबंध में फोटो एवं वीडियो साक्ष्य उपलब्ध हैं, जिन्हें वे जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

पीड़ित परिवार ने कलेक्टर सहित संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, नामांतरण एवं रजिस्ट्री की वैधता की समीक्षा, विवादित भूमि पर निर्माण कार्य पर आवश्यक कार्रवाई तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएगा, या फिर शिकायतकर्ताओं को न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा? फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है और जांच के बाद ही आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सकेगी।